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07 December, 2018
10:00
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Cinema of Resistance

New Cinema and Social Movements: Engaging through the process of Viewing & Screening

A 3 day workshop cum film festival

Sambhaavnaa Institute, Himachal Pradesh (7 से 9 दिसंबर 2018)

 

Sambhaavnaa is very excited to collaborate with ‘Cinema of Resistance’ is holding a three day workshop cum film festival for social and cultural activists and all individuals concerned with alternative media – it production, meanings, connections with issues and people’s movements. This workshop is based on a curation of documentary films which will be screened along with discussions over a period of 3 days. The workshop will be facilitated by Sanjay Joshi, the National Convenor of ‘Cinema of Resistance’ and his colleague Saurabh Kumar. Interactions with film makers and directors would also be part of the screening and workshop. The details of the program are available below in Hindi (as that is the language of dialogue in the workshop)

Scroll down to fill the application form.

For more information please contact Shashank – Whatsapp or Call – 889 422 7954, Email – programs@sambhaavnaa.org

 

प्रतिरोध का सिनेमा

नया सिनेमा : देखने –दिखाने और निर्माण के नए तौर तरीके और जन संघर्षों से जुड़ाव

कार्यशाला और फ़िल्म फ़ेस्टिवल (7 से 9 दिसंबर 2018)

संभावना संस्थान, हिमाचल प्रदेश

फ़िल्म फ़ेस्टिवल और कार्यशाला का शेड्यूल

Schedule Timing Language Director
Day : 1 परिचय और यह फ़ेस्टिवल क्यों
हम और हमारा आदिवासी समाज
गाड़ी लोहरदगा मेला 27 मिनट नागपुरी और हिंदी बीजू टोप्पो और मेघनाथ
हमारे घर 20 मिनट हिंदी किसलय
नया हिन्दुस्तानी कथा सिनेमा
तुरुप 72 मिनट हिंदी प्रस्तुति: एकतारा कलेक्टिव
अगर वो देश बनाती 59 मिनट हिंदी प्रस्तुति: महीन मिर्ज़ा / छत्तीसगढ़
Day : 2 हिमांचल में विकास की अवधारणा दस्तावेज़ी फ़िल्म
हो गयी पीर पर्वत सी 118 मिनट हिंदी सुब्रत कुमार साहू
नया हिन्दुस्तानी सिनेमा
विविध आवाजें 27 मिनट तमिल हिंदी सब टाईटलों के साथ अमुधन आर पी
सुपरमैन ऑफ़ मालेगांव 52 मिनट हिंदी फैज़ा अहमद खान
पहली आवाज़ 54 मिनट हिंदी अजय टी जी
हिन्दुस्तानी सिनेमा में नयी आवाज़ें
निर्णय 52 मिनट हिंदी पुष्पा रावत
Day : 3 फ़ेस्टिवल में शामिल सभी प्रतिभागियों के बीच अपने –अपने इलाके में नए सिनेमा आन्दोलन को लोकप्रिय बनाने के तरीकों पर चर्चा. इस सेशन में सिनेमा सक्रियता के विभिन्न पहलुओं पर बिन्दुवार तरीके से चर्चा की जायेगी

 

पृष्ठभूमि

आज फ़िल्म निर्माण में सेलुलाइड फॉर्मेट की तुलना में बेहद सस्ते डिजिटल फॉर्मेट की वजह से सिनेमा की नयी अभिवाक्तियाँ संभव दिख रही हैं. इस वजह से सिनेमा का निर्माण उन लोगों द्वारा भी हो रहा है जो पहले इसके निर्माण के बारे में सपने में भी सोच नहीं पाते थे. पहले जन आन्दोलनों की खबरें छिटपुट तौर पर अखबार या पत्रिकाओं में ही जगह पाती थीं लेकिन अब आन्दोलनकारी दिखाने की सुविधा उपलब्ध होने के कारण अपनी लड़ाइयों का दस्तावेज़ीकरण करने लगे हैं. इस कारण नयी –नयी जगहों से सिनेमा निर्मित होता दिख रहा है. दिखाने की स्वतंत्रता के कारण सिनेमा विधा घोषित और अघोषित सेंसरशिप से बचकर अपना दिन दूगना रात चौगुना विकास करने में लगी है.

चाक्षुष माध्यम (visual media) की यह नयी हैसियत ही हमारी पृष्ठभूमि है जिसमे हम नए सिनेमा के महत्व को प्रतिभागियों के बीच ले जाना चाहते हैं.  दस्तावेज़ी सिनेमा में फ़िल्म  को देखनादिखाना बहुत गहरे तौर पर जुड़ा है।  इस विधा (mode)  में निर्मित हो रही बहुत सारी फिल्मों का सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों से सीधा जुड़ाव होने  के कारण फ़िल्म की कमेन्टरी या उसके किरदारों की बात को समझना  बहुत जरूरी हो जाता है.

फ़िल्म में दर्शाये गए सत्य को समझने का एक बड़ा मौका निर्देशक से सीधी मुलाकात से अच्छा नहीं हो सकता। इसीलिए पिछले कई वर्षों से ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ अपने फ़िल्म फ़ेस्टिवल देश के कई कोनों में लेता जा रहा है.

इस तीन दिवसीय कार्यशाला तथा फ़िल्म फ़ेस्टिवल का मुख्य उद्देश्य है कि नए दस्तावेजी सिनेमा को सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच ले जाना. पिछले 25 वर्षों में तकनीक की वजह से सिनेमा में देखने –दिखाने और बनाने के तौर –तरीकों में आये गुणात्मक बदलाव और उस वजह से नए हिन्दुस्तानी दस्तावेज़ी सिनेमा के जन संघर्षों के प्रति सहज झुकाव को समझना.

कार्यशाला के उद्देश्य

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है प्रतिभागियों को इस नए और दस्तावेजी सिनेमा सन्दर्भ से परिचित करवाने के साथ –साथ उन्हें इसे अपनाने और आम जीवन में इसको लोकप्रिय बनाने के लिए प्रेरित करना भी है .

  • नया दस्तावेजी सिनेमा क्या है?
  • इन फिल्मों को कैसे देखना – दिखाना
  • इस सिनेमा को संगठनात्मक और सामाजिक संवाद की प्रक्रिया में कब और कैसे ले जाना

यह कार्यशाला किसके लिए 

यह कार्यशाला उन व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं के लिए काम की हो सकती है जो मुख्यधारा के अलावा किसी और भी तरह के मीडिया विकल्पों के बारे में सोचते हों और उसकी निर्मिती, उसको देखने-दिखाने की प्रक्रिया पर चिंतन करना चाहते हैं.

सहजकरता

‘प्रतिरोध के सिनेमा’ के राष्ट्रीय संयोजक संजय जोशी और इसके मुंबई चैप्टर के संयोजक साथी सौरभ कुमार.

कब और कहाँ

7 से 9 दिसंबर 2018, संभावना संस्थान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश

कार्यशाला के लिए योगदान राशि

कार्यशाला में जुड़ने के लिए सहयोग राशि के रूप में रस. 1500/- दे सकते हैं. जो साथी यह शुल्क देने में असमर्थ हैं वो आंशिक योगदान कर सकते हैं. यदि  आप इस कार्यशाला में जुड़ना चाहते हैं और कुछ योगदान देने में असमर्थ हैं तो कृपया programs@sambhaavnaa.org पर संपर्क कर हमें अपना निवेदन भेजें.

(इस कार्यक्रम को पूर्ण रूप से प्रतिभागियोयों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है और इसके लिए कहीं से फंडिंग नहीं ली गयी है. सभी इच्छुक प्रतिभागियों से अपील है की सहयोग राशि ज़रूर प्रदान करें – डिटेल वेबसाइट पर उपलब्ध हैं)

अधिक जानकारी के लिए संपर्क

व्हाट्सप्प/कॉल – शशांक : +91-889 422 7954, ईमेल  programs@sambhaavnaa.org

संभावना पहुँचने के लिए मार्गदर्शन- http://www.sambhaavnaa.org/contact-us/

अन्य जानकारी अथवा पूछताछ के लिए- व्हाट्सप्प/कॉल – शशांक +91-889 422 7954, ईमेल  programs@sambhaavnaa.org

आवेदन फार्म यहाँ भरें –