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20 April, 2018
9.00
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(हिंदी के लिए नीचे स्क्रॉल करें)

Drame Ki Paathshaala
Theatre | Music | Play

 

True learning happens when one risks to experiment with various aspects of the self, through expression and the willingness to change. Theatre as a process, and form of expression, opens up immense possibilities of building individual and collective consciousness.

So, let’s get together to explore creative and artistic ways of expressing our thoughts and feelings and create theatre for dialogue about issues that matter to us. Let us learn new ways of engaging with others and with our selves and make this a fun and enriching experience.

The workshop will end with a theatre performance which will have a unique way of engaging with the spectators, making them part of the play and start a dialogue. The aim of this workshop is to engage with theatre, music and art to express ourselves and learn about some basic theatre for change techniques.

Who is this workshop for?

This workshop is for change-makers, social work practitioners, activists, people associated with people’s movements, theatre artists who work on aspects of social change and young artists exploring to develop techniques for social change.

This workshop is ideal for those who want to begin using Theatre for social change processes.

What to expect from this workshop?

Draame ki Paatsthaala will have a learning-by-doing approach with theatre and art. We will focus on Theatre of the Oppressed techniques that were developed by Augusto Boal in this workshop. The Theatre of the Oppressed practice deeply respects the intellectual faculty of people and therefore has the potential to portray oppression and change the story. This form of theatre focuses not just on acting, but also action. It deliberates on the reflection of reality and a rehearsal for future action.

This workshop will focus on participatory process which offers people the possibility of identifying issues, articulating them in the form of short plays and creating a structure in which an active dialogue between the actors and the spectators is instigated in order to try and change the story. It will evoke an interactive mode of behaviour which stimulates evaluation, critical thinking and imaginative responses.

The work that we will do during these 6 days will be experiential with a summary and de-brief of the techniques we work with, on a periodic basis.

Time frame: 6 days ; 20th to 25th April 2018

Facilitator:

Arundathi is Sambhaavnaa Institute’s in-house theatre facilitator. She has over 10 years of experience in the sector of Social Work. She is a certified Theatre of the Oppressed trainer and has also experimented with Playback Theatre and Psychodrama. Her work with theatre includes disseminating media from conflict affected areas of the country in urban spaces and with youth on a focus on Gender and Social Justice. A few years ago, she co-founded an initiative called Mahua Tripps. To know more about Mahua Tripps, you can see their Facebook page, Youtube channel and Sound Cloud channel.

Venue:  Sambhaavnaa Institute, Palampur, Himachal Pradesh

Contact: For more information please call Shashank – 889 422 7954 or email: programs@sambhaavnaa.org

Programme Contribution:

The contribution amount is Rs. 3500. This includes food, accommodation and training costs for the 6 days.

Do not let money be an impediment to your applying. Need based fee waivers are available.  We have a limited number of scholarships so please apply for a fee waiver if you really need it. Do remember that there may be others who need it more than you.

Getting to Sambhaavnaa: http://www.sambhaavnaa.org/contact/how-to-reach-us/

To apply please fill the application form below:

ड्रामे की पाठशाला 

थिएटर / गीत / खेल 

 

​सच्चा सीखना तभी होता है जब हम अपने विभिन्न पहलुओं के साथ, अभिव्यक्ति के भिन्न माध्यमों से, और बदलने की इच्छा के साथ प्रयोग करने का जोखिम उठाने को तैयार होते हैं। एक प्रक्रिया के रूप में, अथवा अभिव्यक्ति के रूप में, थियेटर (ड्रामा या रंगमंच) व्यक्तिगत एवं सामूहिक चेतना निर्माण की अपार संभावनाएं खोलता है।

तो, आइए हम अपने विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए रचनात्मक और कलात्मक तरीकों की खोज में चलें। हमारी ज़िंदगी और समाज से जुड़े ज़रूरी मुद्दों के बारे में बातचीत करने के लिए थियेटर करें। दूसरों के साथ, और अपने खुद के साथ, जुड़ने के नए तरीकों को सीखें, और यह सब मस्ती और आनंद के साथ करें ।

​ यह कार्यशाला अंत में एक ऎसी प्रस्तुति तैयार करेगी जो अपने दर्शकों के साथ जुड़ने का एक अनोखा तरीका अपनायेगी । उन्हें नाटक का हिस्सा बनाकर, एक संवाद शुरू करने

की प्रक्रिया को जन्मेगी । इस कार्यशाला का उद्देश्य थिएटर, संगीत और कला के साथ खेलते हुए अपने आप को अभिव्यक्त कर पाने, और सामाजिक परिवर्तन के लिए थियेटर के कुछ बुनियादी हुनरों को सीखना है।

यह कार्यशाला किन के लिए है ?

यह कार्यशाला परिवर्तन-कर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, आंदोलनों से जुड़े साथी, सामाजिक परिवर्तन में कार्यरत कलाकारों, और उन नौजवान साथियों के लिए है जो सामाजिक परिवर्तन के लिए नए तरीके ढूंढ रहे हैं.

यह कार्यशाला उन लोगों के लिए विशेषकर है जो सामाजिक बदलाव के लिए थिएटर (रंगमंच) का प्रयोग करने की सोचते हैं ।

इस कार्यशाला से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?

ड्रामे​ की पाठशाला की शैली ‘कर के सीखने’ वाली होगी । इस में ‘थियेटर ऑफ द ​ओप्प्रेस्सड’  ​तकनीक का इस्तेमाल होगा । यह तकनीक अगस्तो बॉल ने विकसित की थी । यह तकनीक लोगों के खुद की सोचने की शक्ति का गहरा सम्मान करती है – और यह मानती है की दमन अथवा शोषण को इस माध्यम से दर्शा कर, लोगों में उस दमनकारी परिस्थिति को बदलने की क्षमता  निर्मित की जा सकती है। थियेटर का यह रूप केवल अभिनय पर केंद्रित नहीं है, बल्कि पहल करने पर, बदलाव के लिए प्रेरित होने पर, बदलाव करने पर जोर देता है। यह दर्शको को अपने हालात को समझने के लिए, उन पर सोचने के लिए मजबूर करती  है – और उनको बदलने के लिए तरीके और हौसला देता है !​

यह कार्यशाला सहभागिता की शैली से होगी। इस प्रक्रिया में प्रतिभागियों को अपने और अपने आस-पास के मुद्दों को पहचानने में मदद मिलेगी। और इन मुद्दों को छोटे नाटकों के रूप में व्यक्त करने में मदद मिलेगी । और यह नाटक इस प्रकार के होंगे जिन से अभिनेताओं और दर्शकों के बीच एक संवाद शुरू होगा – और यही संवाद आगे चल कर दर्शको को अपनी परिस्थिति को बदलने की प्रेरणा देगा। अभिनेताओं और दर्शकों के बीच का यह आदान-प्रदान ही दर्शकों  को अपनी परिस्थिति को गहराई से देखने का, समीक्षित करने का, और उसके निदान के लिए नए और कलात्मक तरीके सोचने में सहायक होगा ।

इन 6 दिनों के दौरान जो  कर के सीखने की प्रक्रिया रहेगी उस में प्रतिभागी और प्रतिभागी-समूह जो करेंगे, उस पर बीच-बीच में चर्चा, टिप्पणी, मूल्यांकन और समझ बांटी जायेगी.

फसिलीटेटर:

​अरुंधति संभावना संस्थान की थियेटर फसिलीटेटर है। सामाजिक कार्य में उनका १० वर्षो का अनुभव है। वो ‘​थिएटर ऑफ़ द ओप्रेस्ड’ तकनीक की एक प्रमाणित ट्रेनर हैं । उन्होंने प्लेबैक थियेटर और साइकोड्रामा के साथ भी प्रयोग किया है। थिएटर के साथ उनका काम देश के संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों की खबरों को शहरी इलाको तक पहुचाना, और युवाओं के साथ लैंगिक और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर काम करने के इर्द-गिर्द है । कुछ साल पहले, उन्होंने म​हुआ​ ट्रिप्स नामक पहल की सह-स्थापना की थी। महुआ ट्रिप्स के बारे में अधिक जानने के लिए आप उनके फेसबुक पेज, यूट्यूब चैनल और साउंड क्लाउड चैनल देख सकते हैं !​

कार्यक्रम का स्थान : संभावना संसथान, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश

संपर्क सूत्र : शशांक – 889 422 7954, ईमेल : programs@sambhaavnaa.org

कार्यक्रम के लिए आप का अंशदान :

योगदान राशि रु 3500 है ! इसमें 6 दिन के लिए भोजन, आवास और प्रशिक्षण की लागत शामिल है।

पैसे अपने आवेदन करने के लिए बाधा न बनने दें ! आवश्यकता के आधार पर सहयोग राशि पर छूट उपलब्ध है। हमारे पास एक सीमित संख्या में छात्रवृत्ति भी उपलब्ध है, इसलिए यदि आपको वास्तव में आवश्यकता है तो ही इसके लिए आवेदन करें। याद रखें कि ऐसे अन्य लोग भी हो सकते हैं, जिन्हें आपसे ज़्यादा इसकी आवश्यकता है!

संभावना पहुँचने की मार्गदर्शिका : http://www.sambhaavnaa.org/contact/how-to-reach-us/

आवेदन के लिए नीचे दिया फार्म भरें :