Home > Programs > Kahaani Aur Sangharsh: A workshop on Visual Story Telling 1-5 Nov’17
01 November, 2017
10:00 AM
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Kahaani Aur Sangharsh 

The Art of Visual Storytelling

November, 1 to 5, 2017

हिंदी के लिए नीचे स्क्रॉल करे


To educate, organize and agitate are three key points of action in most social change initiatives and  Story Telling is a vital component of all these three points of action.

If you are engaged with social change initiatives, your work most likely involves challenging existing belief systems and creating alternative narratives in the face of a dominant one. Whether you are writing a press statement, making a poster, publishing a pamphlet, presenting a slide show, sharing poetry or singing a movement song, you are telling a story. Story by story, bit by bit, you are constantly working towards shifting the narrative.

Why Story telling?

Fact sheets communicate information and data, while stories communicate meaning and emotion. It is feeling and emotion that most often motivates people to act. People are more likely to relate to an issue if they listen and connect with a story about the issue.

While dissemination of information is important and facts are critical, equipping ourselves with meaningful and robust ways of sharing a story makes our communication stronger and the impact more effective. To learn ways in which we share a story that makes the audience think, question, mull over and gradually arrive at the truth is half the battle won.

Story telling is a mutual and participatory process, which acknowledges the audience as living and emotional beings, capable of change. Today, as we witness growing injustices and apathy, learning the art of Story Telling could help us to creatively reach out to variety of audiences to relate with a social issue and work towards social change.

About the workshop

This 5 day workshop will focus on sharpening the participants’ skill to appreciate, identify and analyze stories and the politics they represent. It will also equip the participants with a set of tools/methods to construct the form and expression of a story, visually while staying in tune with its essence.

The workshop will adopt a participatory approach and focus on drawing from experiences of the participants in constructing stories. The participatory nature of this workshop will enable the participants to listen to and share stories with each other and address questions about the politics of the teller and how it contributes to the story in various ways. We will also use multiple media as teaching material such as films, books, music, posters, paintings and written stories told and made by others as examples to learn from.

This workshop will focus on ‘how to build a story’ and set of techniques or tools to build it. So while we will explore and discuss different tools of Story Telling, the focus will also be on coming up with a creative output that could be tested in the field when participants return to their area of work.

The workshop will cover the following key themes:

  • Stories as communication
  • The significance of Story Telling in Social Change
  • The use of visual stories in building a social movement or campaign
  • Processes in Visual Story development
  • Components of an effective story and Story Telling

The participants can choose to work with one of the media during the course.The media that we will be working with during the course of the workshop are:

  • Still and moving images (photo essays, campaign films)
  • Illustrations, graphic novels, posters and story-books

Who is the workshop for?

This workshop is for Storytellers, community mobilisers, artists, activists and campaigners. Anyone else interested in understanding how visual communication for social change could be constructed for variety of audiences, is also welcome.

About the facilitator

Junuka Deshpande is a documentary filmmaker. Her experience of traveling into the remote forests of the country and interacting with the Adivasi communities changed her perspective as a filmmaker and visual artist. Her practice, since then has expanded with the questions of power and hierarchy embedded in the process of documentation and storytelling. Sometimes, it has also become inward and reflexive, giving rise to imaginations that have stemmed from real experiences.

Her teaching practice in Srishti Institute of Art, Design and Technology has been around the art and practice of observation-interaction and its role in image making and story building, while building a relationship between the self and the surrounding. She works with multiple media which draw from a wide range of texts, films and art works.

Her work can be viewed at the following links:



Language: A combination of Hindi and English.

Dates: 1st to 5th November, 2017.

Venue:  Sambhaavnaa Institute, Palampur, Himachal Pradesh

Contact: For more information please call 889 422 7954 or email: programs@sambhaavnaa.org

Programme Contribution:  The contribution amount is Rs. 4,000 for  five days including workshop materials, food and accommodation. If you or your organization is unable to contribute the full amount please mention so in the form below.

Getting to Sambhaavnaa: http://www.sambhaavnaa.org/contact/how-to-reach-us/

To apply please fill the application form below:

कहानी और संघर्ष

समाज में देखे हुए सच की कहानियाँ सुनाने की कला

नवम्बर 1-5, 2017

शिक्षित बनना, संगठित बनना और संघर्ष करना, किसी भी सामाजिक बदलाव के आन्दोलन के यह तीन बिंदु होते हैं. इसमें कहानी सुनाना एक महत्वपूर्ण घटक है.

अगर आप सामाजिक बदलाव की किसी पहल से जुड़े हुए हैं तो बहुत संभव है कि आपका एक काम यह भी होगा कि किसी सर्वमान्य मान्यता के खिलाफ आप वैकल्पिक मान्यता का प्रसार करें. अगर आप प्रेस विज्ञाप्ति बनाना, पैम्फलेट लिखना, पोस्टर बनाना, स्लाइड शो बनाना, कविता पाठन, आन्दोलन का गीत गाने में से कोई भी काम कर रहे हैं तो आप नई कहानी ही सुना रहे होते हैं. एक के बाद एक कहानी, टुकड़ों में बंटी हुई कहानी, इस तरह आप मौजूदा मान्यताओं को बदल रहे होते हैं.

कहानी कहना क्यों ज़रूरी है ?

 तथ्य पत्र सूचनाओं और आंकड़ों का संवहन करते हैं जबकि कहानियां गहरे अर्थ और भावों का संवहन करते हैं. और यह अर्थ और भावनाएं ही अक्सर लोगों को कदम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं. अक्सर लोग किसी मुद्दे से तभी खुद को जोड़ पाते हैं जब वे उससे जुडी कोई कहानी सुनते हैं.

हांलाकि सूचनाओं का लेनदेन महत्वपूर्ण होता है और तथ्य बहुत ज़रूरी होते हैं, लेकिन किसी मुद्दे को कहानी के माध्यम से दूसरों तक पहुंचाने की प्रभावी तकनीक का हमारे पास होना हमारे संवाद की क्षमता को और भी ज़्यादा प्रभावशाली बना देता है. कहानी कहने के तरीकों को सीखना जिससे श्रोता सोचने और सवाल पूछने पर मजबूर हो जाए और सत्य तक पहुँच जाए, हमें आधी लड़ाई जीतने की स्थिति में पहुंचा देता है.

कहानी कहना एक सहभागी और दोतरफा प्रक्रिया है, जिसमें श्रोता को एक जीवंत और भावनात्मक इकाई समझा जाता है, जिसमें उनकी अपनी कहानियों और उनकी राजनैतिक सन्देश को समझा और विश्लेषित किया जाता है. आज जैसा कि हम देखते हैं हमारे चारों तरफ अन्याय और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है, ऐसे में कहानी कहना हमारी मदद कर सकता है जिससे हम अलग अलग तरह के श्रोता समूह से जुड़ सकते हैं और किसी सामाजिक मुद्दे पर जुड़ सकते हैं और बदलाव के लिए मिल कर काम कर सकते हैं.

कार्यशाला के बारे में

कहानियों की प्रशंसा करना, उनका विश्लेषण कर सकना और उनमें कौन सा राजनैतिक सन्देश मौजूद है इसे पहचान पाने की क्षमता को इस कार्यशाला के प्रतिभागियों में बढाने की कोशिश करी जायेगी. इस कार्यशाला में प्रतिभागियों के साथ कहानी का निर्माण और उसका प्रस्तुती के तरीकों को भी साझा किया जाएगा.

इस कार्यशाला में सहभागी पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा और प्रतिभागियों से ही कहानी खोज निकाल लेने की कला बांटी जायेगी. भागीदारी विधि से चलने वाली इस कार्यशाला में प्रतिभागी ऐसे तरीकों को सीख पाएंगे जिससे वे खुद कहानी का निर्माण करने और उसे दूसरों के साथ बांटने की क्षमता विकसित कर पायें. कहानी सुनाने वाले की राजनीति पर सवाल उठाने और कोई कहानी किस तरह मदद कर पा रही है इसे समझने की क्षमता भी देगा. हम इसमें विभिन्न तरह के संचार माध्यमों जैसे फ़िल्में, संगीत, किताबें, पोस्टर चित्र, और लिखित कहानियां जो दूसरों द्वारा कही और बनाई गयी हैं का भी इस्तेमाल करेंगे.

यह कार्यशाला ‘कहानी कैसे बनाएं’ विषय पर विशेष ध्यान देगी और साथ ही कुछ ऐसे तरीके भी सिखाएगी जिससे कहानी का निर्माण किया जा सकता है. तो जहां हम एक तरफ तो कहानी कहने की तकनीक की खोज करेंगे वहीं वे इन खोजी गयी तकनीकों की प्रभावशीलता को अपने क्षेत्र में वापिस जाकर जांच भी सकेंगे.

यह कार्यशाला निम्नलिखित मुख्य मुद्दों पर ध्यान देगी :

  • कहानियां संचार के माध्यम के तौर पर
  • सामाजिक बदलाव में कहानी कहने का कितना महत्व है
  • दृश्य कथाओं का सामाजिक बदलाव के आन्दोलन एवं अभियानों में प्रयोग
  • दृश्य कथा विकसित करने की प्रक्रिया
  • किसी कहानी के महत्वपूर्ण घटक और कहानी सुनाने के प्रभावशाली तत्व

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी काम करने के लिए किसी एक माध्यम का चुनाव करेंगे. कार्यशाला के दौरान हम जिन माध्यमों का इस्तेमाल करेंगे उनमें निम्नलिखित माध्यम शामिल हैं :

  • स्थिर एवं चलचित्र
  • चित्र, पोस्टर, ग्राफिक, पोस्टर, कहानी की किताब, उपन्यास

यह कार्यशाला किनके लिए है ?

इस कार्यशाला में कहानी सुनाने वाले, सामुदायिक कार्यकर्ता, कलाकार, एक्टिविट और अन्य उद्देश्यों के लिए कहानी का उपयोग करने के इच्छुक लोग भाग ले सकते हैं

कार्यशाला की संयोजक के बारे में

जुनुका देशपांडे एक डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं.  आदिवासी इलाकों में जाने और उनसे बात करने के बाद से फिल्म निर्माता के रूप में उनका सोचने का तरीका बहुत बदला है. तबसे सत्ता और वरिष्ठता के क्रम को समझना और उसे चुनौती देने की कहानियों को चित्रित करना उनका मुख्य काम हो गया है.

सृष्टि संस्थान में काम करते हुए उन्होंने किसी परिस्थिति को देखने समझने और उसे कहानी के विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करने की कला को विकसित करने का कार्य किया है. स्वयम के और आसपास के परिवेश के बीच के सम्बन्ध को समझने और व्यक्त करने के लिए अनेकों विधाओं के इस्तेमाल पर उनका लम्बा अनुभव है.

आप उनका काम नीचे दी गयी लिंक पर देख सकते है –



भाषा- हिंदी व अंग्रेजी का मेल होगा

कार्यक्रम की सहयोग राशि-  पांच दिन के कार्यक्रम में भोजन और आवास का शुल्क 4000/- होगा. वे साथी जो आर्थिक सहायता को इच्छुक हैं, कृपया अपने आवेदन में इसका उल्लेख करे.  आवश्यकता के आधार पर आर्थिक मदद उपलब्ध है.

संभावना पहुँचने के लिए मार्गदर्शन- http://www.sambhaavnaa.org/contact-us/

अन्य जानकारी अथवा पूछताछ के लिए-  फोन : +91-889 422 7954, ईमेल  programs@sambhaavnaa.org

आवेदन फॉर्म के लिए ऊपर स्क्रॉल करे